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महाभारत 8.31.55
सारथिर्यस्य वार्ष्णेयो गाण्डीवं यस्य कार्मुकम्तं चेद्धन्तासि राधेय त्वं नो राजा भविष्यसि
sārathiryasya vārṣṇeyo gāṇḍīvaṃ yasya kārmukamtaṃ ceddhantāsi rādheya tvaṃ no rājā bhaviṣyasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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