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महाभारत 8.32.29
साद्रिद्रुमार्णवा भूमिः सवाताम्बुदमम्बरम्सार्केन्दुग्रहनक्षत्रा द्यौश्च व्यक्तं व्यघूर्णत
sādridrumārṇavā bhūmiḥ savātāmbudamambaramsārkendugrahanakṣatrā dyauśca vyaktaṃ vyaghūrṇata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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