महाभारत 8.32.2
एतद्विस्तरतो युद्धं प्रब्रूहि कुशलो ह्यसिन हि तृप्यामि वीराणां शृण्वानो विक्रमान्रणे
etadvistarato yuddhaṃ prabrūhi kuśalo hyasina hi tṛpyāmi vīrāṇāṃ śṛṇvāno vikramānraṇe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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