महाभारत 8.32.31
अथ कर्णो भृशं क्रुद्धः शीघ्रमस्त्रमुदीरयन्जघान पाण्डवीं सेनामासुरीं मघवानिव
atha karṇo bhṛśaṃ kruddhaḥ śīghramastramudīrayanjaghāna pāṇḍavīṃ senāmāsurīṃ maghavāniva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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