महाभारत 8.32.45
पितरं तु परीप्सन्तः कर्णपुत्राः प्रहारिणःत्वदीयाश्चापरे राजन्वीरा वीरानवारयन्
pitaraṃ tu parīpsantaḥ karṇaputrāḥ prahāriṇaḥtvadīyāścāpare rājanvīrā vīrānavārayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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