महाभारत 8.32.81
ततस्ते पाण्डवा राजञ्शिखण्डी च ससात्यकिःराधेयात्परिरक्षन्तो राजानं पर्यवारयन्
tataste pāṇḍavā rājañśikhaṇḍī ca sasātyakiḥrādheyātparirakṣanto rājānaṃ paryavārayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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