महाभारत 8.32.8
अथ संशप्तकाः पार्थमभ्यधावन्वधैषिणःविजये कृतसंकल्पा मृत्युं कृत्वा निवर्तनम्
atha saṃśaptakāḥ pārthamabhyadhāvanvadhaiṣiṇaḥvijaye kṛtasaṃkalpā mṛtyuṃ kṛtvā nivartanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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