महाभारत 8.33.39
मा स्म युध्यस्व कौन्तेय मा च वीरान्समासदःमा चैनानप्रियं ब्रूहि मा च व्रज महारणम्
mā sma yudhyasva kaunteya mā ca vīrānsamāsadaḥmā cainānapriyaṃ brūhi mā ca vraja mahāraṇam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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