महाभारत 8.33.55
तथा तु वितते व्योम्नि निस्वनं शुश्रुवुर्जनाःविमानैरप्सरःसंघैर्गीतवादित्रनिस्वनैः
tathā tu vitate vyomni nisvanaṃ śuśruvurjanāḥvimānairapsaraḥsaṃghairgītavāditranisvanaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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