महाभारत 8.33.63
तस्याः परमपारं च व्रजन्ति विजयैषिणःगाधेन च प्लवन्तश्च निमज्ज्योन्मज्ज्य चापरे
tasyāḥ paramapāraṃ ca vrajanti vijayaiṣiṇaḥgādhena ca plavantaśca nimajjyonmajjya cāpare
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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