महाभारत 8.34.7
अग्रतो मे कृतो राजा छिन्नसर्वपरिच्छदःदुर्योधनस्य प्रीत्यर्थं राधेयेन दुरात्मना
agrato me kṛto rājā chinnasarvaparicchadaḥduryodhanasya prītyarthaṃ rādheyena durātmanā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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