महाभारत 8.35.29ततः सुबलपुत्रस्य नागानतिबलान्पुनःपोथयामास कौन्तेयो द्वापञ्चाशतमाहवेtataḥ subalaputrasya nāgānatibalānpunaḥpothayāmāsa kaunteyo dvāpañcāśatamāhaveइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें