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महाभारत 8.35.2
कर्णो ह्येको रणे हन्ता सृञ्जयान्पाण्डवैः सहइति दुर्योधनः सूत प्राब्रवीन्मां मुहुर्मुहुः
karṇo hyeko raṇe hantā sṛñjayānpāṇḍavaiḥ sahaiti duryodhanaḥ sūta prābravīnmāṃ muhurmuhuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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