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महाभारत 8.35.52
बलौघस्तु समासाद्य बलौघं सहसा रणेउपासर्पत वेगेन जलौघ इव सागरम्
balaughastu samāsādya balaughaṃ sahasā raṇeupāsarpata vegena jalaugha iva sāgaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंबलौघस्तु समासाद्य बलौघं सहसा रणेउपासर्पत वेगेन जलौघ इव सागरम्
balaughastu samāsādya balaughaṃ sahasā raṇeupāsarpata vegena jalaugha iva sāgaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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