महाभारत 8.36.26
ते भुजा भोगिभोगाभाश्चन्दनाक्ता विशां पतेलोहितार्द्रा भृशं रेजुस्तपनीयध्वजा इव
te bhujā bhogibhogābhāścandanāktā viśāṃ patelohitārdrā bhṛśaṃ rejustapanīyadhvajā iva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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