महाभारत 8.37.36
चतुर्दश सहस्राणि यानि शिष्टानि भारतरथानामयुतं चैव त्रिसाहस्राश्च दन्तिनः
caturdaśa sahasrāṇi yāni śiṣṭāni bhāratarathānāmayutaṃ caiva trisāhasrāśca dantinaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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