महाभारत 8.37.9
कपेस्तु निनदं श्रुत्वा संत्रस्ता तव वाहिनीभयं विपुलमादाय निश्चेष्टा समपद्यत
kapestu ninadaṃ śrutvā saṃtrastā tava vāhinībhayaṃ vipulamādāya niśceṣṭā samapadyata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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