महाभारत 8.38.18
ताञ्शरान्प्रेषितांस्तेन समन्ताद्धेमभूषणान्चिच्छेद खड्गमाविध्य भ्रामयंश्च पुनः पुनः
tāñśarānpreṣitāṃstena samantāddhemabhūṣaṇānciccheda khaḍgamāvidhya bhrāmayaṃśca punaḥ punaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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