महाभारत 8.38.20स विचर्मा महाराज खड्गपाणिरुपाद्रवत्कृपस्य वशमापन्नो मृत्योरास्यमिवातुरःsa vicarmā mahārāja khaḍgapāṇirupādravatkṛpasya vaśamāpanno mṛtyorāsyamivāturaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें