महाभारत 8.38.41
धृष्टद्युम्नस्तु बलवाञ्जित्वा शत्रुं महारथम्कौरवान्समरे तूर्णं वारयामास सायकैः
dhṛṣṭadyumnastu balavāñjitvā śatruṃ mahārathamkauravānsamare tūrṇaṃ vārayāmāsa sāyakaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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