महाभारत 8.38.4कृपेण शरवर्षाणि विप्रमुक्तानि संयुगेसृञ्जयाः शातयामासुः शलभानां व्रजा इवkṛpeṇa śaravarṣāṇi vipramuktāni saṃyugesṛñjayāḥ śātayāmāsuḥ śalabhānāṃ vrajā ivaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें