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महाभारत 8.39.16
अथेतरांस्ततः शूरान्द्वाभ्यां द्वाभ्यामताडयत्श्रुतकीर्तेस्तथा चापं चिच्छेद निशितैः शरैः
athetarāṃstataḥ śūrāndvābhyāṃ dvābhyāmatāḍayatśrutakīrtestathā cāpaṃ ciccheda niśitaiḥ śaraiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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