महाभारत 8.39.24
तस्याश्वाः प्रद्रुताः संख्ये पतिते रथसारथौतत्र तत्रैव धावन्तः समदृश्यन्त भारत
tasyāśvāḥ pradrutāḥ saṃkhye patite rathasārathautatra tatraiva dhāvantaḥ samadṛśyanta bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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