महाभारत 8.39.28
तद्बलं पाण्डुपुत्रस्य द्रोणपुत्रप्रतापितम्चुक्षुभे भरतश्रेष्ठ तिमिनेव नदीमुखम्
tadbalaṃ pāṇḍuputrasya droṇaputrapratāpitamcukṣubhe bharataśreṣṭha timineva nadīmukham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें