महाभारत 8.39.9
सात्यकिर्यतमानस्तु धर्मराजश्च पाण्डवःतथेतराणि सैन्यानि न स्म चक्रुः पराक्रमम्
sātyakiryatamānastu dharmarājaśca pāṇḍavaḥtathetarāṇi sainyāni na sma cakruḥ parākramam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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