महाभारत 8.4.24
समः कर्णस्य समरे यः स कर्णस्य पश्यतःवृषसेनो महातेजाः शीघ्रास्त्रः कृतनिश्चयः
samaḥ karṇasya samare yaḥ sa karṇasya paśyataḥvṛṣaseno mahātejāḥ śīghrāstraḥ kṛtaniścayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें