महाभारत 8.4.39
स्यालौ तव महाराज राजानौ वृषकाचलौत्वदर्थे संपराक्रान्तौ निहतौ सव्यसाचिना
syālau tava mahārāja rājānau vṛṣakācalautvadarthe saṃparākrāntau nihatau savyasācinā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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