महाभारत 8.4.42
तथैव रथिनां श्रेष्ठः क्षेमधूर्तिर्विशां पतेनिहतो गदया राजन्भीमसेनेन संयुगे
tathaiva rathināṃ śreṣṭhaḥ kṣemadhūrtirviśāṃ patenihato gadayā rājanbhīmasenena saṃyuge
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें