महाभारत 8.4.4
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
हतः शांतनवो राजन्दुराधर्षः प्रतापवान्हत्वा पाण्डवयोधानामर्बुदं दशभिर्दिनैः
hataḥ śāṃtanavo rājandurādharṣaḥ pratāpavānhatvā pāṇḍavayodhānāmarbudaṃ daśabhirdinaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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