महाभारत 8.40.100
प्रपक्षं स समासाद्य पार्थः काम्बोजरक्षितम्प्रममाथ बलाद्बाणैर्दानवानिव वासवः
prapakṣaṃ sa samāsādya pārthaḥ kāmbojarakṣitampramamātha balādbāṇairdānavāniva vāsavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें