महाभारत 8.40.111
विधुन्वानो महच्चापं कार्तस्वरविभूषितम्आददानः शरान्घोरान्स्वरश्मीनिव भास्करः
vidhunvāno mahaccāpaṃ kārtasvaravibhūṣitamādadānaḥ śarānghorānsvaraśmīniva bhāskaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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