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महाभारत 8.40.48
युध्यमानांस्तु ताञ्शूरान्मनुजेन्द्रः प्रतापवान्अष्टाभिरष्टौ राधेयो न्यहनन्निशितैः शरैः
yudhyamānāṃstu tāñśūrānmanujendraḥ pratāpavānaṣṭābhiraṣṭau rādheyo nyahananniśitaiḥ śaraiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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