महाभारत 8.44.39
कर्णपुत्रस्तु समरे हित्वा नकुलमेव तुजुगोप चक्रं त्वरितं राधेयस्यैव मारिष
karṇaputrastu samare hitvā nakulameva tujugopa cakraṃ tvaritaṃ rādheyasyaiva māriṣa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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