महाभारत 8.44.55
सारथिस्तमपोवाह रथेन रथिनां वरम्ततस्तु सत्वरं राजन्पाण्डुसैन्यमुपाद्रवत्
sārathistamapovāha rathena rathināṃ varamtatastu satvaraṃ rājanpāṇḍusainyamupādravat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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