महाभारत 8.45.31
एतच्छ्रुत्वा तु राधेयो दुर्योधनवचो महत्मद्रराजमिदं वाक्यमब्रवीत्सूतनन्दनः
etacchrutvā tu rādheyo duryodhanavaco mahatmadrarājamidaṃ vākyamabravītsūtanandanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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