महाभारत 8.45.39
प्राकम्पत मही राजन्निहतैस्तैस्ततस्ततःव्याकुलं सर्वमभवत्पाण्डवानां महद्बलम्
prākampata mahī rājannihataistaistatastataḥvyākulaṃ sarvamabhavatpāṇḍavānāṃ mahadbalam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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