महाभारत 8.45.40
कर्णस्त्वेको युधां श्रेष्ठो विधूम इव पावकःदहञ्शत्रून्नरव्याघ्र शुशुभे स परंतपः
karṇastveko yudhāṃ śreṣṭho vidhūma iva pāvakaḥdahañśatrūnnaravyāghra śuśubhe sa paraṃtapaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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