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महाभारत 8.45.51
अर्जुनं चाब्रवीत्कृष्णो भृशं राजा परिक्षतःतमाश्वास्य कुरुश्रेष्ठ ततः कर्णं हनिष्यसि
arjunaṃ cābravītkṛṣṇo bhṛśaṃ rājā parikṣataḥtamāśvāsya kuruśreṣṭha tataḥ karṇaṃ haniṣyasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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