महाभारत 8.45.52
ततो धनंजयो द्रष्टुं राजानं बाणपीडितम्रथेन प्रययौ क्षिप्रं संग्रामे केशवाज्ञया
tato dhanaṃjayo draṣṭuṃ rājānaṃ bāṇapīḍitamrathena prayayau kṣipraṃ saṃgrāme keśavājñayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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