महाभारत 8.45.71
तौ दृष्ट्वा पुरुषव्याघ्रौ क्षेमिणौ पुरुषर्षभमुदाभ्युपगतौ कृष्णावश्विनाविव वासवम्
tau dṛṣṭvā puruṣavyāghrau kṣemiṇau puruṣarṣabhamudābhyupagatau kṛṣṇāvaśvināviva vāsavam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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