महाभारत 8.45.9
ततोऽर्जुनो हयान्हत्वा सर्वांस्तस्य महात्मनःचकार समरे भूमिं शोणितौघतरङ्गिणीम्
tato'rjuno hayānhatvā sarvāṃstasya mahātmanaḥcakāra samare bhūmiṃ śoṇitaughataraṅgiṇīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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