महाभारत 8.46.28
धृतराष्ट्रो हि योधेषु सर्वेष्वेव सदार्जुनतव मृत्युं रणे कर्णं मन्यते पुरुषर्षभः
dhṛtarāṣṭro hi yodheṣu sarveṣveva sadārjunatava mṛtyuṃ raṇe karṇaṃ manyate puruṣarṣabhaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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