महाभारत 8.49.35
सोऽन्धौ च मातापितरौ बिभर्त्यन्यांश्च संश्रितान्स्वधर्मनिरतो नित्यं सत्यवागनसूयकः
so'ndhau ca mātāpitarau bibhartyanyāṃśca saṃśritānsvadharmanirato nityaṃ satyavāganasūyakaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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