महाभारत 8.49.37
अदृष्टपूर्वमपि तत्सत्त्वं तेन हतं तदाअन्वेव च ततो व्योम्नः पुष्पवर्षमवापतत्
adṛṣṭapūrvamapi tatsattvaṃ tena hataṃ tadāanveva ca tato vyomnaḥ puṣpavarṣamavāpatat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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