महाभारत 8.49.39
तद्भूतं सर्वभूतानामभावाय किलार्जुनतपस्तप्त्वा वरं प्राप्तं कृतमन्धं स्वयंभुवा
tadbhūtaṃ sarvabhūtānāmabhāvāya kilārjunatapastaptvā varaṃ prāptaṃ kṛtamandhaṃ svayaṃbhuvā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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