महाभारत 8.49.51
येऽन्यायेन जिहीर्षन्तो जना इच्छन्ति कर्हिचित्अकूजनेन चेन्मोक्षो नात्र कूजेत्कथंचन
ye'nyāyena jihīrṣanto janā icchanti karhicitakūjanena cenmokṣo nātra kūjetkathaṃcana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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