महाभारत 8.49.5
तं दृष्ट्वा नृपशार्दूलं शार्दूलसमविक्रमम्हर्षकाले तु संप्राप्ते कस्मात्त्वा मन्युराविशत्
taṃ dṛṣṭvā nṛpaśārdūlaṃ śārdūlasamavikramamharṣakāle tu saṃprāpte kasmāttvā manyurāviśat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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