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महाभारत 8.49.62
हन्यामहं केशव तं प्रसह्य; भीमो हन्यात्तूबरकेति चोक्तःतन्मे राजा प्रोक्तवांस्ते समक्षं; धनुर्देहीत्यसकृद्वृष्णिसिंह
hanyāmahaṃ keśava taṃ prasahya; bhīmo hanyāttūbaraketi coktaḥtanme rājā proktavāṃste samakṣaṃ; dhanurdehītyasakṛdvṛṣṇisiṃha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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