महाभारत 8.49.6
न तं पश्यामि कौन्तेय यस्ते वध्यो भवेदिहकस्माद्भवान्महाखड्गं परिगृह्णाति सत्वरम्
na taṃ paśyāmi kaunteya yaste vadhyo bhavedihakasmādbhavānmahākhaḍgaṃ parigṛhṇāti satvaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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