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महाभारत 8.49.89
तमाह कृष्णः किमिदं पुनर्भवा;न्विकोशमाकाशनिभं करोत्यसिम्प्रब्रूहि सत्यं पुनरुत्तरं विधे;र्वचः प्रवक्ष्याम्यहमर्थसिद्धये
tamāha kṛṣṇaḥ kimidaṃ punarbhavā;nvikośamākāśanibhaṃ karotyasimprabrūhi satyaṃ punaruttaraṃ vidhe;rvacaḥ pravakṣyāmyahamarthasiddhaye
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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